रविवार, 26 सितंबर 2010

येदुरप्पा का कैबिनेट विस्तार

तूफान से पहले की खामोशी!
कर्नाटक में येदुरप्पा ने आखिरकार महीनों से लंबित अपने कैबिनेट विस्तार को अंजाम दे ही दिया और वो भी बिल्कुल अपनी पसंद का ख्याल रखते हुए। ये और बात है कि कैबिनेट विस्तार से पहले पूरी राजनीतिक ड्रामेबाजी हुई। लेकिन अंत में सभी को येदुरप्पा के फैसले के साथ समझौता करना ही पड़ा। चाहे वो रेड्डी बंधु हों जिन्होंने पिछले साल शोभा करंदलाजे को मंत्रिमंडल से निकलवाकर और जगदीश शेट्टर को मंत्री बनवा कर ही दम लिया था और येदुरप्पा की आंखों में सार्वजनिक मंच पर आंसु तक ला दिया था। पर वहीं शोभा अब फिर मंत्रीमंडल में आ चुकी हैं लेकिन सब खामोश हैं। अब ना तो आत्महत्या की धमकी देने वाले गुलीहट्टी आत्महत्या कर रहे हैं और ना ही इस्तीफे की धमकी देने वालों ने अपना इस्तीफा पेश किया है।


दरअसल, इस कैबिनेट विस्तार को येदुरप्पा की कूटनीतिक सफलता कहा जा सकता है। क्योंकि उन्होंने सारे दवाबों को किनारे कर वही किया जो करना चाहते थे और सबसे बड़ी बात ये कि उनके इन फैसलों पर पार्टी हाईकमान ने अपनी मुहर लगा कर फिलवक्त सारे असंतुष्टों का मुंह बंद कर दिया है।

अपनी चीन यात्रा से वापस आने के तुरंत बाद ही येदुरप्पा ने कैबिनेट का विस्तार करने की घोषणा की और इसके साथ ही राज्य में राजनीतिक ड्रामेबाजी का दौर शुरू हो गया। पहले तो मुख्यमंत्री और कर्नाटक भाजपा राज्य इकाई के अध्यक्ष के.एसईश्वरप्पा की ही अलग सोच सामने आ गई। जहां ईश्वरप्पा कैबिनेट से चार मंत्रियों को केवल हटाए जाने की बात कर रहे थे वहीं येदुरप्पा किसी को हटाए जाने से इन्कार कर रहे थे और साथ ही खाली मंत्रीपदों को वापस भरने की भी बात कर रहे थे। गौरतलब है कि हाल ही में तीन मंत्रियों को विभिन्न आरोपों के कारण मंत्रीपद से इस्तीफा देना पड़ा था। स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री रामचंद्र गौड़ा को बहाली घोटाले के कारण, धार्मिक मामलों के मंत्री एस.एन कृष्णैया शेट्टी को भूमि घोटाले के कारण और खाद्य और आपूर्ति मंत्री एच हलप्पा को बलात्कार के आरोप के कारण।

बहरहाल, इस घोषणा के साथ ही मंत्री पद की चाह रखने वाले विधायको और उनके समर्थकों और कैबिनेट से निकाले जाने वाले मंत्रियों ने येदुरप्पा पर तरह तरह से दबाव बनाने की कोशिश की। खेल और युवा मामलों के मंत्री गुलीहट्टी शेखर ने आत्महत्या कर लेने की धमकी दी तो एक और मंत्री ने इस्तीफा दे देने की धमकी दी। इसके अलावा ढ़ेरों विधायक पार्टी से त्यागपत्र देने की धमकी दे रहे थे। गौरतलब है कि शेखर निर्दलीय विधायक हैं जिन्हंे राज्य में भाजपा सरकार बनाने में सहयोग करने के बदले मंत्रीपद मिला था। इसी तरह पब्लिक लाईब्रेरी मंत्री के शिवनगौड़ा नाईक भी जेडीएस से जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुए थे और मंत्री बने थे। ये भी गौर करने वाले बात है कि 2008 में राज्य में बनी भाजपा की पहली सरकार में पांच निर्दलीय विधायकों को पार्टी के साथ लाने में रेड्डी बंधुओं की अहम भूमिका रही थी। इसलिए वो निर्दलीय मंत्रियों को हटाए जाने के विरोध में थे।

इस ड्रामेबाजी के तहत बड़ा झटका देने की कोशिश कैबिनेट में शामिल होने की चाह रखने वाले दो विधायक सी टी रवि और एस के बेल्लुबी ने की जब उन्हें पता चला कि वो मंत्री नहीं बनाए जाएंगे तो वो सात विधायकों के साथ बंगलूरू के एक होटल में विरोध की योजना बनाने लगे।



मामला जब बंगलूरू में नहीं सुलझा तो दिल्ली का रूख करना पड़ा। जहां लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी वरिष्ठ नेता वैंक्यया नायडू और शांताकुमार ने येदुरप्पा के मंत्रीमंडल विस्तार के फैसलों पर सहमति की मुहर लगाई।

अब जिन छः नए मंत्रियों ने शपथ लिया उनके नाम हैं, शोभा करंदलाजे, वी सोमन्ना, सी सी पाटिल, ए नारायणस्वामी, एस ए रामदास, और सी एच विजयशंकर। इनमें शोभा और सोमन्ना येदुरप्पा के खास लोगों में से हैं, और बाकी चार भी भाजपा के ही विधायक हैं।शोभा को उर्जा मंत्रालय मिला है, वी सोमन्ना के जिम्मे खाद्य और नागरिक आपूर्ति है, सी एच विजय शंकर को वन और पर्यावरण दिया गया है ए नारायण स्वामी समाज कल्याण और सी सी पाटिल महिला और बाल विकास तथा एस ए रामदास को स्वास्थ्य शिक्षा।

तीन जिन्हें हटाया गया वे हैं, उच्च शिक्षा मंत्री अरविंद लिंबावली, खेल और युवा मामलों के मंत्री गुलीहट्टी डी शेखर और लाईब्रेरी मंत्री शिवन्नगौडा नाईक। यानी कुल पांच निर्दलीय विधायकों में से केवल एक को ही हटाया गया है, चार अभी भी मंत्री हैं।

इसके अलावा एक बड़ा बदलाव ये भी हुआ है कि वी एस आचार्य को गृहमंत्रालय की जगह उच्च शिक्षा और योजना और सांख्यिकी दे दिया गया है और तर्क ये दिया गया है कि आचार्य काबिल मंत्री हैं इसलिए उन्हें ज्यादा अहम् मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि परिवहन मंत्री आर. अशोक को पविहन के साथ गृहमंत्रालय भी दे दिया गया है।

बहरहाल, हाईकमान के दखल से अभी सभी को शांत कर लिया गया है। अवैध खनन मामले में फंसे रेड्डी बंधु भी शांत रहकर अपनी ओर से ध्यान हटाना चाह रहे हैं जबकि केन्द्रीय नेतृत्व कर्नाटक भाजपा के अंर्तकलह को बार-बार सुर्खियां बनते नहीं देखना चाहता इसलिए फिलहाल उपरी तौर पर सब कुछ शांत दिख रहा है पर ये तूफान से पहले की भी शान्ति हो सकती है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. filhaal is shanti ki vajah se aapke jeevan mein bhi shaanti bani rahegi... aur karnatka ke log bhi chain se rahenge... lekin tufaan ke baad ... aapki ki khabar ka intezar rahega...

    ek badi baat... issi baat par... pata nahi kyuni..shaanti khabre nahi banati...hamesha ashanti hi khabre kyun banati hai? sochiyega.. aur kuch samajh aaye to likhiyega...

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  2. manorma ji , am really sorry if you feel like that..am sensible person and try to read between lines..i just mean to say ..aap patrkaar hain aur iss mudde par kuch din shaanti bani rahegi... aur mujhe shaanti ke baad aane wale tufaan par aapki khabar ka intezar rahega.. that's it... if u think there is anything wrong..am sorry .. bests...

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