रविवार, 24 जनवरी 2010

कहना तो बहुत कुछ है।

बहुत िदनों से अपने ब्लाग पर कुछ िलख्ाने की सोच रही थ्ाी पर मैं तकनीकी िदक्कतों की वजह से िलख्ा पाने आैर पोस्ट कर पाने में सक्ष्ाम नहीं हो पा रही थ्ाी। आज िफर कोिशश की है,कहना तो बहुत कुछ है लेकिन अभ्ाी मैं इस माध्यम की तकनीक में कमजोर हंु आैर यहां बंगलूरू में अभ्ाी तक इस संबंध्ा में कोई मदद नहीं िदख्ा पायी है। लेकिन मेरी कोिशाशों जारी हैं ट्रायल आैर ईरर में यकीन करती हंू आिख्ारकार रास्ता बन ही जाएगा।
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.