बुधवार, 11 अगस्त 2010

ग्रीन जाब यानी ग्रीन इकानमी

(Inext में प्रकाशित लेख)
हाल ही में इंटरनेशनल लेबर आॅरगनाईजेशन के साथ भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने ग्रीन जाॅब पर कान्फ्रेंस का आयोजन किया। यह अपनी तरह का पहला कान्फ्रेंस था और रोजगार को लेकर सरकार के नजरिये में भी बदलाव की ओर इशारा कर रहा था। सुनने में ये कुछ अजीब सा लगे पर हकीकत यही है आने वाला समय ग्रीन जाॅब्स का ही है। इसलिए देश के श्रम और रोजगार मंत्री ने लो कार्बन इकोनाॅमी के लिए पाॅलिसी के स्तर पर संरचात्मक बदलाव और इसमें निवेश की बात की। साथ ही एनवायरन्मेंट फ्रेंडली रोजगार संभावनाओं और मौजूदा व्यवसायों को भी ग्रीन इकाॅनमी में बदलने पर चर्चा की।

ग्रीन जाॅब्स आखिर है क्या? दरअसल, ये वो रोजगार हैं जो उत्पादन आैर उपभोग के साईकिल को पर्यावरण के अनुकूल बना सकते हैं। ग्रीन जाॅब ऐसे टिकाउ अर्थव्यवस्था और समाज का प्रतीक तीक है जो पर्यावरण की फिक्र और उसकी रक्षा खुद अपने और अपनी आगे आने वाली पीढ़ी के लिए करने को लेकर सचेत है। इसके तहत ग्रीन एनर्जी एफििशएंट इमारतें, पर्यावरण अनुकूल खेती, वाटर हारवेटिस्टंग, वेस्ट मैनेजमंट, एनवायरन्मेंट फ्रेंडली तरीके से बिजली और ईंधन का उत्पादन वगैरह-वगैरह शामिल है। दरअसल, हर काम या रोजगार के ग्रीन जाॅब होने की संभावनाएं हैं वो भी मुनाफे से बगैर समझौता और सस्टेनेबल विकास को कायम रखते हुए।

लेकिन ग्रीन जाॅब्स का मतलब केवल रिन्यूयेबल एनर्जी, जैव िविवधता संरक्षण , वेस्ट मैनेजमेंट, वाटर हारवेस्टिंग और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना ही नहीं बल्कि रोजगार के पैटर्न में ही बदलाव है। ताकि  उत्पादन आैर उपभोग एनवायन्मेंट फ्रेंडली बन सके। जैसे-जैसे पर्यावरण और क्लाईमेट चेंज के प्रति सभी की जागरूकता बढ़ेगी ग्रीन जाॅब सेक्टर करोड़ों नई नौकरियां पैदा करेगा। लेकिन इन संभावनाओं को पैदा करने और उनका पूरी तरह से फायदा उठाने के लिए सही समय पर सही पाॅलिसी बनाना भी उतना ही जरूरी है साथ ही शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में समय रहते इस हिसाब से बदलाव भी।

पिछले दिनों आर्थिक मंदी के दौरान ये अनुभव किया गया कि ग्रीन जाॅब्स सभी के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोल सकता है। क्योंकि इसके तहत अधिकांशतः रोजगार का सृजन प्राकृतिक संसाधनों को मैनेज करके किया जा सकता है। इंटरनेशनल लेबर आॅरगनाईजेशन का ग्रीन जाॅब प्रोग्राम आज दुनिया के बहुत से देशों में शुरू हो चुका है। एशिया में भारत, बांग्लादेश,चीन, थाईलैंड और फिलीपींस में इस संबंध में पायलट प्रोग्राम चलाया जा रहा है। जिसका मकसद ग्रीन जाॅब की संभावनाओं और एनवायन्मेंट फ्रेन्डली रोजगार पैदा करने के बारे में लोगों में जागरूकता लाना है। साथ ही इससे जुड़ी नीतियों के बारे में चर्चा भी।



बहरहाल, भारत में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम जैसी योजनाओं में सरकार ने पर्यावरण और रोजगार के बीच तालमेल को तवज्जो दी है। आर्थिक विकास रोजगार के नए मौकों का सृजन और गरीबी हटाना आज ये हर सरकार की प्राथमकिता है। लेकिन साथ ही अपने अस्तित्व के लिए पानी, हवा और अन्य सभी नैचुरल रिसोर्सज का संरक्षण भी उतना ही जरूरी हो गया है। इसलिए , ग्रोथ,  प्रोडक्शन आैर कंजम्पशन को पर्यावरण के साथ जोड़ना ही होगा। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मार्च 2009 में श्रम और रोजगार मंत्रालय ने आईएलओ के सहयोग से ग्रीन जाॅब और क्लाईमेट चेंज पर मल्टीस्टेकहोल्डर टास्कफोर्स बनाया गया। इस टास्कफोर्स में सरकारी विभागों के प्रतिनिधयों, रिसर्च इंस्टीट्यूट, एनजीओ, वकर्स और एम्प्लायर्स को शामिल किया गया है, ताकि एनवायरन्मेंट फ्रेंडली रोजगार और नीतियों के बारे में एक राय बन सके।

दरअसल, दो दशक पहले जैसी क्रांति आईटी से आयी थी ग्रीन जाॅब भी अब वही करने जा रहा है। रिन्यूयेबल एनर्जी से लेकर, पर्यावरण संरक्षण, वाटर और वेस्ट मैनेजमेंट और जलवायु से जुड़े अन्य सेक्टर में अपार रोजगार की संभावनाएं हैं। एक्सपर्ट की राय में आने वाले दिनों में भारत के 6 लाख गांवों में ही वाटर और वेस्ट मैनेजरों की जरूरत होगी यानी 1.2 करोड़ लोगों के लिए रोजगार पैदा होगा।

इंटरनेशनल लेबर आॅरगनाईजेशन की एक रिसर्च में भी इस बात का खुलासा किया गया है कि क्यों रिसेसन के दौरान दुनिया की बहुत सी सरकारें पर्यावरण को इतनी तव्वजों दे रही हैं और गंभीरता से ले रही हैं। दरअसल, इस रिसर्च के मुताबिक 2020 तक एनवायन्मेंटल प्रोडक्ट और सर्विस की मार्केट वैल्यू 2.740 लाख करोड़ तक हो जाने का अनुमान है। यानी ‘गो ग्रीन  इज फ्यूचर, क्योंकि आनेवाला समय ग्रीन एम्प्लायमेंट और ग्रीन इकाॅनमी के ही नाम होने वाला है।

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